हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंतः व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है यह आप कैसे कह सकते हैं?

हिरोशिमा पर लिखी कविता में कवि ने अपने मन के भीतर उठे तूफ़ान एवं अनुभूत त्रासदी को अपने शब्दों में उतारने की कोशिश की है| उसने हिरोशिमा में घटी उस भयानकतम त्रासदी को अपनी अनुभूति के आधार पर व्यक्त करने की कोशिश की है| कवि ने हिरोशिमा के भयंकर रूप को देखा था, कवि ने उन पीड़ितों की हालत को देखा| पीड़ितों की हालत को देखकर लेखक के मन में उनके प्रति सहानुभूति तो उत्पन्न हुई होगी किंतु वह लेखक की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बनी। लेखक शहर में निकला तो उसे एक स्थान पर एक पत्थर के ऊपर मनुष्य की छाया दिखाई दी और मनुष्य की उस छाया को देखकर उस त्रासदी का सारा दृश्य उसकी आँखों के सामने उभर आया और उस भयानक त्रासदी को लेखक ने प्रत्यक्ष रूप में महसूस कर लिया| उसने अणु-बम के विस्फोट से हुई उस त्रासदी को प्रत्यक्ष रूप में जी लिया| जैसे यह घटना उसके साथ ही घटी हो| मानो बम उसकी उपस्थिति में ही फटा हो| वह त्रासदी जब लेखक ने प्रत्यक्ष रूप में महसूस कर ली तो लेखक का मन उस भयानकतम दुर्घटना के बारे में लिखने के लिए अधीर हो गया| इस तरह हम कह सकते हैं कि हिरोशिमा पर लिखी कविता अंतः दबाव का परिणाम थी।

बाह्य दबाव मात्र इतना हो सकता है कि जापान से लौटने पर लेखक ने अभी तक कुछ नहीं लिखा? वह इससे प्रभावित हुआ होगा और कविता लिख दी होगी अथवा इस सबसे भयानकतम दुर्घटना के बारे में लिखना उस वक्त की आवश्यकता रही हो|


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